Friday, May 15, 2026

मरुधरा का गौरव: ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक जोधपुर (जोधपुर स्थापना दिवस) #12_मई

मरुधरा का गौरव: ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक जोधपुर
​प्रस्तावना
राजस्थान की वीर प्रसूता भूमि पर जब हम इतिहास के पन्ने पलटते हैं, तो मारवाड़ का नाम स्वर्णाक्षरों में उभरता है। 'राव जोधा' द्वारा बसाया गया जोधपुर केवल एक शहर नहीं, बल्कि शौर्य, त्याग और कला का जीवंत प्रतीक है। जैसा कि मारवाड़ की माटी के लिए कहा गया है:
​"जननी जणे तो एड़ा जण, जेड़ा दुर्गादास।
माथै राखी मांडवो, बिना थांभ आकाश।।"

​(अर्थात्: हे माता! पुत्र जन्म दे तो वीर दुर्गादास जैसा, जिसने बिना किसी स्वार्थ के मारवाड़ के सम्मान को अपने कंधों पर थामे रखा।)
​ऐतिहासिक वैभव
​जोधपुर की स्थापना सन् 1459 में राव जोधा ने की थी। यहाँ का मेहरानगढ़ दुर्ग चिड़ियानाथ की पहाड़ी पर अडिग खड़ा है, जो आज भी राव जोधा के संकल्प की गवाही देता है। इस किले की दीवारों में जहाँ एक ओर वीरता की कहानियाँ दफन हैं, वहीं दूसरी ओर 'मखमली कलम' से लिखी गई साहित्यिक विरासत भी है। मारवाड़ के शासकों ने न केवल तलवार के धनी होने का परिचय दिया, बल्कि कला और साहित्य के संरक्षक भी रहे।
​कला एवं वास्तुकला
​जोधपुर की स्थापत्य कला में 'छीतर के पत्थर' का जादुई उपयोग दिखाई देता है। उम्मेद भवन पैलेस की भव्यता हो या जसवंत थड़ा की शांति, यहाँ की हर ईंट इतिहास का राग अलापती है। मारवाड़ की चित्रकला शैली (जोधपुर शैली) में लाल और पीले रंगों का विशेष प्रयोग, ढोला-मारू के प्रेमाख्यान और वीर गाथाओं को जीवंत कर देता है।
​सांस्कृतिक धरोहर और लोक जीवन
​जोधपुर की संस्कृति यहाँ के खान-पान, पहनावे और लोकगीतों में रची-बसी है। 'मिर्ची बड़ा' और 'मावे की कचोरी' का स्वाद जितना तीखा और मीठा है, यहाँ के लोगों का स्वभाव उतना ही मिलनसार और ओजस्वी है। यहाँ की संस्कृति के बारे में प्रसिद्ध है:
​"हाथ कंकण, मुख ऊजलो, धींगाणे री धाक।
मरुधरा रा मानवी, राखे ऊँची साख।।"

​(अर्थात्: यहाँ के मनुष्यों के हाथों में कंगन जैसा सौंदर्य और मुख पर तेज है। वे अपनी आन-बान और शान के लिए हमेशा अडिग रहते हैं।)
​यहाँ के 'गैर' और 'घूमर' नृत्य तथा 'लंगा-मांगणियार' कलाकारों की सुरीली तान मरुस्थल की रातों में अमृत घोल देती है। साफा (पगड़ी) यहाँ के सम्मान का प्रतीक है, जिसकी हर गाँठ में मारवाड़ की मर्यादा बंधी है।

सूर्य नगरी एवं नीली नगरी के रूप में
जोधपुर अपनी इन दो खासियतों—नीले घरों की शांति और सूरज की प्रखर आभा—के कारण ही पूरी दुनिया के पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बना रहता है।
​उपसंहार
​आज जोधपुर आधुनिकता और प्राचीनता का अनूठा संगम है। यहाँ का हस्तशिल्प पूरे विश्व में विख्यात है। हमें यह समझना चाहिए कि हमारा इतिहास केवल युद्धों का इतिहास नहीं है, बल्कि यह संघर्ष के बीच खिलती हुई कला और संवेदनाओं का इतिहास है।
​अंत में, मारवाड़ की इस पावन धरा को नमन करते हुए यही कहा जा सकता है:
​"धरा निराली मारवाड़, वीरा री तलवार।
भक्ति, शक्ति अरु प्रेम रो, इण धरती पर सार।।"

Wednesday, October 9, 2024

आरम्भ हैं प्रचण्ड...

आरम्भ है प्रचण्ड,
बोले मस्तकों के झुंड
आज जंग की घड़ी की
तुम गुहार दो


आन बान शान या कि
जान का हो दान आज
इक धनुष के बाण पे
उतार दो


आरम्भ है प्रचण्ड...

मन करे सो प्राण दे,
जो मन करे सो प्राण ले
वही तो एक सर्वशक्तिमान है


कृष्ण की पुकार है,
ये भागवत का सार है कि
युद्ध ही तो वीर का प्रमाण है

कौरवों की भीड़ हो या
पांडवों का नीड़ हो

जो लड़ सका है वो ही तो महान है


 जीत की हवस नहीं,
किसी पे कोई वश नहीं
क्या ज़िन्दगी है ठोकरों
पे मार दो मौत अंत है नहीं,
तो मौत से भी क्यों डरें ये
जा के आसमान में दहाड़ दो


 आरम्भ है प्रचंड...

वो दया का भाव,या कि
शौर्य का चुनाव या कि
हार का वो घाव तुम ये
सोच लो या कि पूरे
भाल पे जला रहे
विजय का लाल लाल
ये गुलाल तुम ये सोच लो
रंग केसरी हो या मृदंग केसरीहो
या कि केसरी हो ताल
तुम ये सोच लो



"जिस कवि की कल्पना में,
ज़िन्दगी हो प्रेम गीत
उस कवि को आज
तुम नकार दो

भीगती मसों में आज,
फूलती रगों में आज
आग की लपट का
तुम बघार दो"

आरम्भ है प्रचंड...


-पियूष मिश्रा सर

Saturday, September 14, 2024

रेनेसां क्लासेस जयपुर

अपने परिस्थितियों का लंबा सफर

और एक बहुत ही छोटा सा स्कोर..

झोला लेकर चल पड़े हैं कदम

आज ये रेनेशाॅ की ओर.. 



धुंधला रास्ता साफ मन

कल को बनाने मिटाने आज का छोर....

झोला लेकर चल पड़े हैं कदम

आज ये रेनेशाॅ की ओर...



कल अर्जुन का रथ कृष्ण ने हाका

आज ये कृष्ण धमाकर अपनी अर्जुन को डोर....

झोला लेकर चल पड़े हैं कदम

आज ये रेनेशाॅ की ओर....

Saturday, August 17, 2024

केमल कलर [व्यापार प्रचार विज्ञापन प्रतियोगिता] कक्षा 5

केमल कलर

अरे भर लो, भर लो,
जिन्दगी में रंग भर लो...।

खरिद लो पहले केमल कलर..
 उठा लो अपनी शर्ट का कॉलर

फिर दिखाओं अपना हुनर
देखो लाल हो गई मेरी गुड़ि‌या की चूनर..।।

अरे भर लो भर लो..
जिन्दगी में रंग भर लो

सूख गई नदियों, नीला रंग भर लो,
इन्द्रधनुष में सतरंग भर लो ...


खरिद लो जी खरिद लो केमल कलर खरिद लो
प्रदुषित धरती की कालिमा में हरा रंग भर लो।

बबूल टूथ पेस्ट [व्यापार प्रचार विज्ञापन प्रतियोगिता] कक्षा 5



बबूल टूथ पेस्ट

अरे लेलो, रे लेलो.......
कम दाम में देश का भविष्य लेलो।


अरे चटपटा खाने वालों का है जमाना।
पर दाँतों की सुरक्षा को नहीं है गंवाना ॥

एक सुरक्षा दाँतों की....
तो दुसरी सुरक्षा भारत की....

स्वदेशी को हैं अपनाना
बबूल से ही दांतों को चमकाता...

अरे चटपटा खाने वालों का है जमाना ।
पर दाँतो की सुरक्षा को नहीं हैं गंवाना ॥

एक फूल हैं हमें खिलाना
स्वदेशी बबूल का है क्रय करना।

सफेर मजबूत दातों के साथ है मुस्कुराना अपने देश के भविष्य को है बचाना.

अरे लेलो रे,लेलो,
कम दाम में देश का भविष्य ले लो।

मरुधरा का गौरव: ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक जोधपुर (जोधपुर स्थापना दिवस) #12_मई

मरुधरा का गौरव: ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक जोधपुर ​प्रस्तावना राजस्थान की वीर प्रसूता भूमि पर जब हम इतिहास के पन्ने पलटते हैं, तो मारवाड़ का ना...