Wednesday, October 9, 2024

आरम्भ हैं प्रचण्ड...

आरम्भ है प्रचण्ड,
बोले मस्तकों के झुंड
आज जंग की घड़ी की
तुम गुहार दो


आन बान शान या कि
जान का हो दान आज
इक धनुष के बाण पे
उतार दो


आरम्भ है प्रचण्ड...

मन करे सो प्राण दे,
जो मन करे सो प्राण ले
वही तो एक सर्वशक्तिमान है


कृष्ण की पुकार है,
ये भागवत का सार है कि
युद्ध ही तो वीर का प्रमाण है

कौरवों की भीड़ हो या
पांडवों का नीड़ हो

जो लड़ सका है वो ही तो महान है


 जीत की हवस नहीं,
किसी पे कोई वश नहीं
क्या ज़िन्दगी है ठोकरों
पे मार दो मौत अंत है नहीं,
तो मौत से भी क्यों डरें ये
जा के आसमान में दहाड़ दो


 आरम्भ है प्रचंड...

वो दया का भाव,या कि
शौर्य का चुनाव या कि
हार का वो घाव तुम ये
सोच लो या कि पूरे
भाल पे जला रहे
विजय का लाल लाल
ये गुलाल तुम ये सोच लो
रंग केसरी हो या मृदंग केसरीहो
या कि केसरी हो ताल
तुम ये सोच लो



"जिस कवि की कल्पना में,
ज़िन्दगी हो प्रेम गीत
उस कवि को आज
तुम नकार दो

भीगती मसों में आज,
फूलती रगों में आज
आग की लपट का
तुम बघार दो"

आरम्भ है प्रचंड...


-पियूष मिश्रा सर

Saturday, September 14, 2024

रेनेसां क्लासेस जयपुर

अपने परिस्थितियों का लंबा सफर

और एक बहुत ही छोटा सा स्कोर..

झोला लेकर चल पड़े हैं कदम

आज ये रेनेशाॅ की ओर.. 



धुंधला रास्ता साफ मन

कल को बनाने मिटाने आज का छोर....

झोला लेकर चल पड़े हैं कदम

आज ये रेनेशाॅ की ओर...



कल अर्जुन का रथ कृष्ण ने हाका

आज ये कृष्ण धमाकर अपनी अर्जुन को डोर....

झोला लेकर चल पड़े हैं कदम

आज ये रेनेशाॅ की ओर....

Saturday, August 17, 2024

केमल कलर [व्यापार प्रचार विज्ञापन प्रतियोगिता] कक्षा 5

केमल कलर

अरे भर लो, भर लो,
जिन्दगी में रंग भर लो...।

खरिद लो पहले केमल कलर..
 उठा लो अपनी शर्ट का कॉलर

फिर दिखाओं अपना हुनर
देखो लाल हो गई मेरी गुड़ि‌या की चूनर..।।

अरे भर लो भर लो..
जिन्दगी में रंग भर लो

सूख गई नदियों, नीला रंग भर लो,
इन्द्रधनुष में सतरंग भर लो ...


खरिद लो जी खरिद लो केमल कलर खरिद लो
प्रदुषित धरती की कालिमा में हरा रंग भर लो।

बबूल टूथ पेस्ट [व्यापार प्रचार विज्ञापन प्रतियोगिता] कक्षा 5



बबूल टूथ पेस्ट

अरे लेलो, रे लेलो.......
कम दाम में देश का भविष्य लेलो।


अरे चटपटा खाने वालों का है जमाना।
पर दाँतों की सुरक्षा को नहीं है गंवाना ॥

एक सुरक्षा दाँतों की....
तो दुसरी सुरक्षा भारत की....

स्वदेशी को हैं अपनाना
बबूल से ही दांतों को चमकाता...

अरे चटपटा खाने वालों का है जमाना ।
पर दाँतो की सुरक्षा को नहीं हैं गंवाना ॥

एक फूल हैं हमें खिलाना
स्वदेशी बबूल का है क्रय करना।

सफेर मजबूत दातों के साथ है मुस्कुराना अपने देश के भविष्य को है बचाना.

अरे लेलो रे,लेलो,
कम दाम में देश का भविष्य ले लो।

आरम्भ हैं प्रचण्ड...

आरम्भ है प्रचण्ड, बोले मस्तकों के झुंड आज जंग की घड़ी की तुम गुहार दो आन बान शान या कि जान का हो दान आज इक धनुष के बाण पे उतार दो आरम्भ है प...