Thursday, August 27, 2020

प्रकृति के सुकुमार कवि सुमित्रानंदन पंत


पंत जी का प्रारंभिक नाम गुसाईं दत्त रखा गया था 1921 में महात्मा गांधी एवं असहयोग आंदोलन से प्रभावित होकर कॉलेज छोड़ दिया था चौथी कक्षा में पंत जी ने कविता लिखनी शुरू की थी पंथ के प्रथम कविता गिरजे का घंटा सन् 1916 प्रकाशित हुई 

प्रसाद के काव्य को चार भागों में बांटा जा सकता है
 प्रथम चरण(छायावादी)
-उच्छवास 
-ग्रंथि 
-वीणा 
-पल्लव 
-गुंजन 
द्वितीय चरण (प्रगतिवादी युग)
- युगांत
- युगवाणी
-ग्राम्या 
तृतीय चरण (अरविंद दर्शन से प्रभावित)
-स्वर्ण किरण
- स्वर्ण धूलि
-युगांतर
-युगपथ
चतुर्थ चरण (मानवीय दर्शन से प्रभावित)
-रजत शिखर
- अतिमा
-वापी
-कला और बूढ़ा चांद
 -चिदंबरा
-लोकायतन
- खादी के फूल (बच्चन  जी  के साथ मिलकर लिखा)

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