Sunday, September 27, 2020

अधूरा है संसार बिना बेटियां (स्वरचित कविता)


रात के अंधेरे में जुगनू-सी है बेटियां,
शबनम पर ओस की बूंद-सी है बेटियां,
दिन की तपन में शीतल छाया-सी है बेटियां,
पराई होकर भी अपनी है बेटियां।

निराशा में आशा की किरण है बेटियां,
चार दीवारों के सन्नाटे में मधुर स्वर है बेटियां,
रिश्तो की बागडोर मे रेशम है बेटियां,
पराया को अपना मान सकती हैं सिर्फ बेटियां।

रुलाती है तो हंसाती भी है बेटियां,
चिढ़ाती है तो मनाती भी हैं बेटियां,
हर त्योहार की प्रति छाया है बेटियां,
संस्कार की परिभाषा है बेटियां,

हर जख्म की मरहम है बेटियां,
हर दवा में दुआ है बेटियां,
हर गम को,
कम करने की ताकत है बेटियां
कैसी हो मां पूछ कर,
हर दर्द मिटा देती हैं बेटियां।

हर गीत का सूर है बेटियां,
हर नाच की ताल है बेटियां,
हर जीत का जश्न है बेटियां,
हर कला की शैली है बेटियां।


समाज की अभद्रता से दूर हैं बेटियां,
जगत के कुरूपता में हूर है बेटियां,
सोलह श्रृंगार का असली नूर है बेटियां
परिवार के मान-सम्मान की गुरुर है बेटियां,

पिता का ताज है बेटियां,
मां का नाज है बेटियां,
भाई की कलाई की शान है बेटियां
घर वहीं जहां बहू बन जाती है बेटियां

सच में अधूरा है संसार बिना बेटियां।

***
27 सितंबर 2020
राष्ट्रीय बेटी दिवस
(भारत)

1 comment:

  1. बेटी दिवस की ढेर सारी शुभकामनाएं

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