Wednesday, August 19, 2020

हुआ सवेरा जाग(स्वरचित कविता)


जाग बेटा जाग...
हुआ सवेरा जाग

सपनों की दुनिया तोड़
कल्पना आकाश छोड़

हकीकत का समझ महत्व
उठ निभाना है तुझे दायित्व

सुन बेटा सुन...
तेरे खिलौने की धुन
तू ही है उसका खून
वह है तेरे बिन सून

बोल बेटा बोल...
मन का आपा खोल
खिलौना है तेरे अनमोल
दिला दें उनका अपना मोल

पुकार बेटा पुकार...
अपने खिलौनों की झंकार
तू है उनकी खनकार
छोड़ अपना अंधकार
प्रकाश का बंद हकदार

जाग बेटा जाग
हुआ सवेरा जाग....

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