आओ! मिलकर हिंदी को आगे बढ़ाएं..जो विचार मन में दबे हैं उन्हें बाहर लाएं..ऐसी कल्पना जो अद्भुत हो..जो सबसे अलग हो उसको सामने लाएं..और जो इतिहास में महान कवि हुए हैं..उनको फिर से याद करें..उनकी पंक्तियों को फिर से दोहराएं..जिनकी कलम तलवारों से भी तेज़ चली..फिर से उन्हें काव्यांजलि चढ़ाएं..आओ! हिंदी को सवारे..आओ दोस्तों! मिलकर हिंदी को फिर से दुल्हन सा सजाएं..
Tuesday, August 18, 2020
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'खरगोश का सोना...उस दिन'
कितना मुश्किल था उस दिन लेखक के लिए खरगोश को हराना... कितना आसान था उस दिन खरगोश के लिए दौड़ का जीत जाना... कछुए की जीत से ज्य...
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मरुधरा का गौरव: ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक जोधपुर प्रस्तावना राजस्थान की वीर प्रसूता भूमि पर जब हम इतिहास के पन्ने पलटते हैं, तो मारवाड़ का ना...
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मैथिलीशरण गुप्त का जन्म 3 अगस्त 1886 में पिता सेठ रामचरण कनकने और माता काशी बाई की तीसरी संतान के रूप में उत्तर प्रदेश में झांसी के पास चिरग...

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