इन बेजुबान सुस्त आंखों में,
जगा एक सपना..
दिल के रिश्तो से बना,
प्यार के मध्य कर हो अपना..
ना ईर्ष्या का हो आलम,
ना नफरत का हो तूफान..
दिल की महासागर में,
बस प्यार ही प्यार का हो उफान..
जहां हर रात
सुबह जल्दी उठने का हो जोश..
दिनभर की उस
चहल-पहल में रहे ना मुझे अपना होश..
मां मे गौरी
पाऊं और बाबा में शिव..
इन्हीं के आशीर्वाद से
उस आशियाने की खुदी हो नीव..
जहां सबका मन हो निर्मल नीर..
बिन कहे सब एक समझे एक दूसरे की पीर..
इन चंचल शरारती आंखों में,
चमका एक ख्वाब..
इस जहां का सबसे प्यारा,
हो मेरे दिल का नवाब..
सहना पाए हम पल भर के लिए भी
एक दूसरे की जुदाई..
ऐसी परिवार के लिए होगी वफाई
अगर करदूं अपनी जान के साथ बेवफाई..
इन बेजुबान सुस्त आंखों में.....

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