1-प्रसाद जी कवि, नाटकार, कथाकार, उपन्यासकार और निबन्धकार थे।
2-वे हिन्दी के छायावादी युग के चार प्रमुख स्तंभों में से एक हैं lउन्होंने हिंदी काव्य में छायावाद की स्थापना की l
3-उन्होंने कविता, कहानी, नाटक, उपन्यास और आलोचनात्मक निबंध आदि विभिन्न विधाओं में रचना की। उनकी रचनाएँ हैं;
* काव्य: झरना, आँसू, लहर, कामायनी, प्रेम पथिक
*नाटक: स्कंदगुप्त, चंद्रगुप्त, ध्रुवस्वामिनी, जन्मेजय का नाग यज्ञ, राज्यश्री, अजातशत्रु, विशाख, एक घूँट, कामना, करुणालय, कल्याणी परिणय, अग्निमित्र, प्रायश्चित, सज्जन
* कहानी संग्रह: छाया, प्रतिध्वनि, आकाशदीप, आँधी, इंद्रजाल
*उपन्यास : कंकाल, तितली और इरावती ।

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