Sunday, August 23, 2020

[बड़ा ही विचित्र ब्लॉक है जिसमें 2000 से अब तब के 140+ टेलीविजन सीरियलों के नाम हैl]


"जब कहानी तेरी मेरी होगी तब बनेगी अपनी बात"

आज की बात तबकि है जब मेरे स्कूल डेज थेlमेरे पापा अविनाश IPSऔर मां CID
दोनों अलग-अलग ऑफिस-ऑफिस में काम करते थेlमेरे एक भैया है उसका नाम श्री कृष्णा है वो कसम से इतनी शरारत करता है कि उसके सामने क्या मस्ती क्या धूम मची रहती हैंl

एक बार हम-दोनों आंगन में बैठकर कोरे-कागज पर कविता लिख रहे थे कि अचानक हमने आसमान पर तितलियों के साथ सोनपरी देखी फिर हमारे चाचा चौधरी ने आकर कहा आज तुम्हें कुछ कर दिखाना है तुम दोनों में से कौन बनेगा करोड़पति और कमजोर कड़ी कौन का पता चलेगा किसमें कितना है दम आज देखेंगे हम क्योंकि अब मैं पूछने वाला हूं सवाल 10 करोड़ का l

तभी मम्मी खाने खजाने मे से मिर्च मसालों की खिचड़ी बना कर लाई, रात हुई, उस दिन हमने एक टूटता तारा भी देखा l कैंपस की लाइट बंद हुईl

सुबह सवेरे मिस्टर एंड मिसेज माधुरी हमारे घर आए आते ही पूछा भाभी जी घर पर है वह शास्त्र विधि जानते थे ये उन दिनों की बात है जब हमारे घर में कभी हादसा तो कभी हकीकत होते रहते थे वहां की सन्नाटे और आहट सुनकर लगता शशशशशशश कोई है l मानो या ना मानो हर शनिवार को कोई ना कोई नया हॉरर शो तो होते रहते थे लगता था कि कोई सैटरडे सस्पेंस होlयह अनहोनी हमने उनसे बताई उन्होंने कहा या तो तुम महाभारत, रामायण, विष्णु पुराण का पाठ करो या फिर तुम पिकनिक चले जाओlवास्तव में अभी तुम्हारी कुंडली में अनेक कसौटी जिंदगी की हैl सौभाग्यवती भव का आशीर्वाद देकर चले गए l

हम उसी दिन कश्मीर चले गएl हम पांच सहेलियां गई थीl रास्ते में उस दिन तो तारक मेहता का उल्टा चश्मा लगाकर बिल्कुल रोडीज लग रही थी
मेरी सहेली कुसुम, देवी, हीना, अवंतिका और मैंl
हिना और अवंतिका का पति एक थाlएक दूसरे की कभी सौतन कभी सहेली थीl हम देवों के देव महादेव और सिद्धिविनायक के मंदिर से पहले घूमना चाहते थे इसलिए हम घूमने गए l

मेरी सहेली कुसुम और मेरे बीच में वैसे तो बड़ी तू-तू मैं-मैं होती है फिर भी हमने एक-दूजे के लिए कंगन, लिपस्टिक, चूड़ियां खरीदी lमैंने तो उसके लिए स्पेशल हरे कांच की चूड़ियां खरीदी उसने मेरे लिए कुमकुम खरीदा..कहते हैं वहां का कुमकुम- भाग्य है जो हर कदम पर शगुन करता है फिर हम सब कागज की कश्ती में बैठकर चिड़ियाघर, सर्कस, द्रोपदी और राजारांचू का नाटक देखने चले गए वहां से मेरी तीन सहेलियां अपने घर चली गई लेकिन कश्मीर में हमारा कौन अपना कौन पराया फिर हम दोनों मंदिर चले गए l

हमारे परिवार वाले लोग भी वहां पहुंच गएlअब हम सात-आठ हैंl हम सभी गुरुकुल की यात्रा के लिए जय माता की करते चले गए, वहां हमने कमल पर विराजमान मां लक्ष्मी जी मे आस्था जताई lवहां के  bigboss मतलब पुजारी जी का प्रवचन सुना और उन्होंने बताया कि घर एक मंदिर है,हर कहानी घर घर की, कहानी सात फेरों की समान होती है l कर्म करते जाओ क्योंकि सास भी कभी बहू थी l

पुजारी जी ने भी अपनी संतानों में से कृष्णा के साथ सात फेरे अर्जुन के साथ करवा लिएlकृष्णार्जुन अपने मां    बाबुल की दुआ लेकर, पवित्र रिश्ता बांधकर मेहंदी तेरे नाम की लगा कर, किसी की भाभी बनकर, पिया के घर    बालिका वधू बन चली गई l पहरेदार पिया की ने कुंडली भाग्य मे बदल दी.. अक्सर लोग पूछतेेे हैं ये रिश्ता क्या कहलाता है.. ये हैै मोहब्बतें जो दिल से दिल तक जाती हैं जिसमें इश्कबाज स्यापा इश्क को सद्दाहक़ समझते हैं

इतनी पवित्र रिश्ते देखकर हमारी दास्तान में शांति आ गई lफिर हमारी जिंदगी की स्प्लिट्सविला मे आती रही बहारें lहमने कोशिश एक आशा मानकर मेहनत कर माल कमाया, क्योंकि माल है तो ताल ले वरना हड़ताल है lवहां जाकर हम तो परदेसी हो गए पता ही नहीं चला कब देश में निकला होगा चांदl

ऐसी जन्नत को देखकर अपने कुटुम की याद आ गई मगर अफसोस कभी आई ना जुदाई वही बात हो गई मैं अपनी सहेलियों से जुदा हो गई मुझे उन पलों से जस्ट मोहब्बत, आशिकी हो चुकी थी l आज भी स्मृति में कैद है जैसे चांद के टुकडे हमने कलश में संजोकर रखेे हो..बिल्कुल सच जैसे कोई सच का सामना किया हो बड़े अच्छे लगते हैं वे पल l वहां का बसेरा देखकर सबकी हसरतें है है बढ़ जाती थी, लगता था कोई अपना सा है यहां लेकिन जब कोई है नहीं तो किसे अपना कहें यहां lहमारी दो लफ्जों की अधूरी कहानी बस इतनी ही है पर, दिल है कि मानता नहीं, हर वक्त पूछता रहता है क्यों होता है प्यार l

हमारा जोश खत्म नहीं हुआ हमने फिर अचानक 37 साल बाद का प्रोग्राम रखा..शायद हम सभी सहेलियों दुबारा मिल ना पाएं लेकिन फिर भी हमने पुनः मिलन का चैलेंज किया l

हर मोड़ पर, कहता है दिल, कहीं किसी रोज, कहीं तो मिलेंगे...

No comments:

Post a Comment

आरम्भ हैं प्रचण्ड...

आरम्भ है प्रचण्ड, बोले मस्तकों के झुंड आज जंग की घड़ी की तुम गुहार दो आन बान शान या कि जान का हो दान आज इक धनुष के बाण पे उतार दो आरम्भ है प...