खड़ा हूं एक सुंदर बगिया में,
दिख रहे हैं मीठे फल उन टहनियों में,
खुजली चल रही है मेरी हथेलियों में,
चमक रहे हैं सपने मेरी अंखियों मेंl
खाऊंगा जरूर सबसे मीठे फल को
जिऊंगा तब मैं हर एक उस पल को
मां-छुटकी को भी खिलालूंगा कल को
तभी नजर गई मेरे तल कोl
टूटा सपना एक क्षणिक में
बंट गया वह एक कणित मेंl
एडी ऊंची कर लड़ा हूं
फिर भी फल से दूर खड़ा हूं
शायद मैं बहुत छोटा हूं
इसलिए फल खाने में खूंटा हूंl
मैल नहीं है इसमें मेरा
खेल है ऊपर वाले तेराl
उस धनुषधारी ने किया ये अपमान
अब चुप बैठा है वह पार आसमान
उंगली ना बनाई उसने पांचों एक समान
उठाऊंगा मैं भी आज अपने दर्दों का तीर कमानl
सहसा एहसास हुआ खड़ा है कोई मेरे पीछे
उसे देखकर शर्म से हुए नेत्र मेरे नीचेl
था वह दोस्त मेरा मुनिया
देख नहीं सकता था वह दुनियाl
देख सकता हूं मैं हजार फलों को
वह देख नहीं सकता अपने ही पलों कोl
अब तक मन था मेरा सूखा गागर
बन गया है अब वह अपार सागरl
मिल गया जवाब मुझे एक तिल में
रखूंगा यह बात सदा मैं अपने दिल मेंl
जो ना मिला उसे भूलाकर
जो मिला है उसे पाकरl
बनूंगा एक नया सपना
तब नहीं चूकूंगा उसे बनाने में अपनाl
चंद पलों के लिए,
मांगा था एक मूल्यवान फल..
जिंदगी भर के लिए,
दे दिया तूने मुझे 'अमूल्य फल'l
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