Sunday, September 27, 2020

अपनी हिंदी( स्वरचित कविता)


"बहुत ही मीठी है अपनी हिंदी

कहीं इसका स्वाद खट्टा ना हो जाए,

बहुत ही सुंदर है अपनी हिंदी

कहीं इसका श्रृंगार कम ना पड़ जाए,

बड़ी सरल है अपनी हिंदी

कहीं कठिनाइयों में उलझ ना जाए,

नाज़ हैं अपना ताज है अपना हिंदी

कहीं इसके सम्मान में कमी ना हो जाए,

एक शब्द के अनेक अर्थ

अनेक शब्दों का एक अर्थ

बड़ा ही विचित्र भंडार रखती है मेरी हिंदी

कहीं इसकी संपन्नता कम ना हो जाए,

जागो उठो परचम लहराओ

हिंदी के गौरव में कहीं कमी ना रह जाए,

उन्नति का आसमान छुए अपनी हिंदी

कहीं अपना कदम छोटा ना पड़ जाए।"

( स्वरचित)

***

अधूरा है संसार बिना बेटियां (स्वरचित कविता)


रात के अंधेरे में जुगनू-सी है बेटियां,
शबनम पर ओस की बूंद-सी है बेटियां,
दिन की तपन में शीतल छाया-सी है बेटियां,
पराई होकर भी अपनी है बेटियां।

निराशा में आशा की किरण है बेटियां,
चार दीवारों के सन्नाटे में मधुर स्वर है बेटियां,
रिश्तो की बागडोर मे रेशम है बेटियां,
पराया को अपना मान सकती हैं सिर्फ बेटियां।

रुलाती है तो हंसाती भी है बेटियां,
चिढ़ाती है तो मनाती भी हैं बेटियां,
हर त्योहार की प्रति छाया है बेटियां,
संस्कार की परिभाषा है बेटियां,

हर जख्म की मरहम है बेटियां,
हर दवा में दुआ है बेटियां,
हर गम को,
कम करने की ताकत है बेटियां
कैसी हो मां पूछ कर,
हर दर्द मिटा देती हैं बेटियां।

हर गीत का सूर है बेटियां,
हर नाच की ताल है बेटियां,
हर जीत का जश्न है बेटियां,
हर कला की शैली है बेटियां।


समाज की अभद्रता से दूर हैं बेटियां,
जगत के कुरूपता में हूर है बेटियां,
सोलह श्रृंगार का असली नूर है बेटियां
परिवार के मान-सम्मान की गुरुर है बेटियां,

पिता का ताज है बेटियां,
मां का नाज है बेटियां,
भाई की कलाई की शान है बेटियां
घर वहीं जहां बहू बन जाती है बेटियां

सच में अधूरा है संसार बिना बेटियां।

***
27 सितंबर 2020
राष्ट्रीय बेटी दिवस
(भारत)

Monday, September 14, 2020

मेरे पति का दफ्तर (स्वरचित कविता)


यह वही इमारत है
जिसकी आधी वफादार मैं हूंl
जगती हूं हर रोज जल्दी
तो देर यहां नहीं होती है
बड़ा ही विचित्र लगाव है
मेरे पति का इस दफ्तर से..
जुड़े थे मेरे लिए इस दफ्तर से..
आज मेरा नंबर इसके बाद लगता हैl
...........मेरे पति का दफ्तर

यह वही मंदिर है
जिसकी आधी पुजारिन मैं हूंl
करती हूं घर से हर रोज दीया
तो ज्योत यहां जगती है
बड़ा ही विचित्र रिश्ता हैं
मेरा इस दफ्तर से..
जब ज्योत यहां जगती हैं
तो वहां मेरे घर का चूल्हा जगता है
..........मेरे पति का दफ्तर

यह वही रणभूमि है
जिसकी आधी वीरांगना मैं हूंl
सोती नहीं मैं आधी रातों तब
जब तक यह जगता है
बड़ा ही विचित्र सौदा है
हमारा इस दफ्तर से...
युवावस्था का स्वर्णिम काल लेकर
बुढ़ापा कोहिनूर बनाता है
..........मेरे पति का दफ्तर

14 सितंबर 'हिंदी दिवस'




"मजहब नहीं सिखाता,आपस में बैर रखना
हिन्दी हैं हम,वतन है हिन्दोस्ताँ हमारा"

मोहम्मद इकबाल साहब की इन पंक्तियों पर हमें गर्व होना चाहिए कि हम इतनी बड़ी आबादी वाले  देश हिंदुस्तान के रहने वाले हैं और भाषा ही हमारी पहचान है
 
"पग पग पर बदले  पानी
पग पग पर बदले वाणी..."
 
 "विविधता में एकता भारत की विशेषता"

भले ही हिंदुस्तान विभिन्न बोलियों के मोतियों की माला वाला देश रहा है लेकिन इस हिंदुस्तान की माला का धागा हमेशा हिंदी ही रहा है..

आज 14 सितंबर संपूर्ण भारत में हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाता है...

कहा जाता है 'व्यौहार राजेन्द्र सिंहा' का जन्म दिवस आज के दिन पड़ता हैl उनका अमूल्य योगदान रहा है हिंदी के विकास में... उनकी ही याद में हिंदी दिवस 14 सितंबर को मनाया जाता हैl

*आज से 43 साल पहले अटल बिहारी वाजपेयी ने संयुक्त राष्ट्र में हिंदी में बोलने का फैसला किया...वे उस समय मोरारजी देसाई की सरकार में विदेश मंत्री थे... सन 1977 में संयुक्त राष्ट्र महासभा का 32वां सत्र था...संयुक्त राष्ट्र महासभा में उनका पहला संबोधन था और उन्होंने अपनी बात हिंदी में कहने का फैसला किया।

गर्व है हमें राष्ट्र के इन नेताओं पर।

*प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने  संयुक्त राष्ट्र महासभा के 75वें सत्र में हिंदी भाषा में संबोधित किया। उन्होंने अपने संबोधन में वैश्विक चुनौतियों के साथ भारत की उपलब्धियों को भी रेखांकित किया। 

*प्रधानमंत्री मोदी इससे पहले भी संयुक्त राष्ट्र में संबोधित कर चुके हैं। वह देश के लिए सम्मान और गौरव के क्षण थे।

*इससे पहले बीते वर्ष देश के सम्मान में उस समय और अधिक इजाफा हुआ था जब संयुक्त राष्ट्र संघ ने ट्विटर पर हिंदी में अपना अकाउंट बनाया और हिंदी भाषा में ही पहला ट्वीट किया। पहले ट्वीट में लिखा संदेश पढ़कर हर भारतीय का सीना गर्व से चौड़ा हो जाएगा। इतना ही नहीं संयुक्त राष्ट्र संघ ने फेसबुक पर भी हिंदी पेज बनाया है।



हिंदी की बिंदी की माध्यम से मेरा एक प्रयास है हिंदी को बढ़ावा देनाl
हमारी भाषा ही हमारी पहचान है और अपनी पहचान को एक नया स्तर तक पहुंचाना.. मैं अपना कर्तव्य समझती हूं।

*हिन्दी दिवस प्रत्येक वर्ष 14 सितम्बर को मनाया जाता है।

*14 सितम्बर 1949 को संविधान सभा ने सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया कि हिंदी ही भारत की राजभाषा होगी।

*इसी महत्वपूर्ण निर्णय के महत्व को प्रतिपादित करने तथा हिन्दी को हर क्षेत्र में प्रसारित करने के लिये राष्ट्रभाषा प्रचार समिति वर्धा के अनुरोध पर वर्ष 1953 से पूरे भारत में 14 सितम्बर को प्रतिवर्ष हिन्दी-दिवस के रूप में मनाया जाता है।

*एक तथ्य यह भी है कि 14 सितम्बर 1949 को हिन्दी के पुरोधा व्यौहार राजेन्द्र सिंहा का 50-वां जन्मदिन था, जिन्होंने हिन्दी को राष्ट्रभाषा बनाने के लिए बहुत लंबा संघर्ष किया ।

*स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद हिन्दी को राष्ट्रभाषा के रूप में स्थापित करवाने के लिए काका कालकेलकर मैथिलीशरण गुप्त हजारी प्रसाद द्विवेदी सेठ गोविंद दास आदि साहित्यकारों को साथ लेकर व्यौहार राजेन्द्र सिंहा ने अथक प्रयास किए।

*मुझे मेरी भाषा हिंदी पर गर्व है क्योंकि मेरी हिंदी का प्रथम वर्ण 'अ' से अज्ञ से शुरु होकर 'ज्ञ' से ज्ञान तब लेकर जाता है।

*भारत की नागरिक होने के नाते मुझे आज गर्व है कि मैंने मेरी ब्लॉग की शुरुआत हिंदी में ही की..
मैं गूगल की आभारी हूं क्योंकि उन्होंने ब्लॉक में हिंदी भाषा की टाइपिंग को जोड़ा।

*सन्1918 में गांधीजी ने हिंदी साहित्य सम्मेलन में हिन्दी भाषा को राष्ट्रभाषा बनाने को कहा था। इसे गांधी जी ने जनमानस की भाषा भी कहा था।

*14 सितम्बर 1949 को काफी विचार-विमर्श के बाद यह निर्णय लिया गया जो भारतीय संविधान के भाग 17 के अध्याय की अनुच्छेद 343(1) में इस प्रकार वर्णित है:

*संघ की राष्ट्रभाषा हिन्दी और लिपि देवनागरी होगी। संघ के राजकीय प्रयोजनों के लिए प्रयोग होने वाले अंकों का रूप अंतर्राष्ट्रीय रूप होगा।

 *बोलने वालों की संख्या के अनुसार अंग्रेजी और चीनी भाषा के बाद हिन्दी भाषा पूरे दुनिया में तीसरी सबसे बड़ी भाषा है।
-लेकिन उसे अच्छी तरह से समझने, पढ़ने और लिखने वालों में यह संख्या बहुत ही कम है।

इस कारण ऐसे लोग जो हिन्दी का ज्ञान रखते हैं या हिन्दी भाषा जानते हैं, उन्हें हिन्दी के प्रति अपने कर्तव्य का बोध करवाने के लिए इस दिन को हिन्दी दिवस के रूप में मनाया जाता है

जिससे वे सभी अपने कर्तव्य का पालन कर हिन्दी भाषा को भविष्य में विलुप्त होने से बचा सकें।

-लेकिन लोग और सरकार दोनों ही इसके लिए उदासीन दिखती है।हिन्दी को आज तक संयुक्त राष्ट्र संघ की भाषा नहीं बनाया जा सका है।

*इसे विडंबना ही कहेंगे कि योग को 177 देशों का समर्थन मिला, लेकिन हिन्दी के लिए 129 देशों का समर्थन क्या नहीं जुटाया जा सकता?

* हिंदी की बिंदी मेरा पहला कदम है।

* गर्व इस बात पर नहीं कि कहां तक जाएगा जबकि इस बात पर है कि बढ़ रहे पाश्चात्यकरण की स्थिति में मेरा यह कदम एक हिंदुस्तानी की आत्मा का प्रतिदर्शी होगा।

Friday, September 11, 2020

आज दादा जी का श्राद्ध था (स्वरचित कविता)


सुबह जल्दी उठने का दिन था
खीर पुरी बनाने का नियम था
चल रहा उस वक्त पितृपक्ष था
और आज दादा जी का श्राद्ध था

मेरा बेटा भी उठ गया,मेरे साथ था
क्या कर रही हो यह उसका सवाल था
श्राद्ध उसे समझाना मेरा मंतव्य था
पुश्तैनी रीति रिवाज उसे सौंपना कर्तव्य था
आज दादा जी का श्राद्ध था....

जो चले जाते हैं दुनिया से,
कौवा बन मिलने आते हैं अपनों से,
तर्पण होता है उनकी पसंदीदा व्यंजन से,
श्राद्ध होता है बस श्रद्धा से,

मम्मा प्यार तो मैं भी करता हूं आप से,
मैं क्या रखूं आपके लिए पूछा उसने धीरे से,
सुनकर मुस्कुरा पड़ी मैं खुशी से,
जीते जी मिल गया हर तर्पण उन कोमल शब्दों से,

मासूमियत से उसने कुछ कहा था..
असल में कुछ में सब कुछ कह दिया था..
चल उस वक्त पित्र पक्ष था
और आज दादाजी का श्राद्ध थाll


Saturday, September 5, 2020

राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त


मैथिलीशरण गुप्त का जन्म 3 अगस्त 1886 में पिता सेठ रामचरण कनकने और माता काशी बाई की तीसरी संतान के रूप में उत्तर प्रदेश में झांसी के पास चिरगांव में हुआ।

प्रथम काव्य संग्रह "रंग में भंग" तथा बाद में "जयद्रथ वध" प्रकाशित हुई। उन्होंने  बंगाली के काव्य ग्रन्थ "मेघनाथ वध", "ब्रजांगना" का अनुवाद भी किया। सन् 1912 - 1913 ई. में राष्ट्रीय भावनाओं से ओत-प्रोत  "भारतभारती' का प्रकाशन किया। उनकी लोकप्रियता सर्वत्र फैल गई।


*महाकाव्य- साकेत, यशोधर

*खण्डकाव्य- जयद्रथ वध, भारत-भारती, पंचवटी, द्वापर, सिद्धराज, नहुष, अंजलि और अर्घ्य, अजित, अर्जन और विसर्जन, काबा और कर्बला, किसान, कुणाल गीत, गुरु तेग बहादुर, गुरुकुल , जय भारत, युद्ध, झंकार , पृथ्वीपुत्र, वक संहार

 *शकुंतला, विश्व वेदना, राजा प्रजा, विष्णुप्रिया, उर्मिला, लीला, प्रदक्षिणा, दिवोदास भूमि-भाग

*नाटक - रंग में भंग , राजा-प्रजा, वन वैभव , विकट भट , विरहिणी , वैतालिक, शक्ति, सैरन्ध्री  स्वदेश संगीत, हिड़िम्बा , हिन्दू, चंद्रहास

Friday, September 4, 2020

वह मेरी शिक्षिका थी (स्वरचित कविता)


बचपन में मां जिसके भरोसे मुझे स्कूल छोड़कर निश्चिंत लौट जाया करती थी..
मां की याद में जिसका आंचल मे सिसका करती थी..
पानी की बोतल और टिफिन का ढक्कन जिसने खोलना सिखाया..वह मेरी शिक्षिका थी
दिन को रात भी अगर जिसने कह दिया उस पर भी विश्वास करने वाला अंधविश्वास जिसका था वह मेरी पहली शिक्षिका थी..

मेरी प्राइमरी शिक्षिका शिक्षिका नहीं मेरी दूसरी मां-सी थी

ज्ञान तो किताबों में भी पड़ा है जो व्यावहारिक ज्ञान दिया करती थी...
सैद्धांतिक तरीके से उठना बैठना आना-जाना
जिस ने सिखाया था वह मेरी शिक्षिका थी..
मां का प्यार और पिता की डांट तो अक्षर खूब मिला करती थी
पर प्यार से डांट जिसकी मिलती थी वह मेरी शिक्षिका थी

मेरी शिक्षिका मेरी शिक्षिका नहीं निष्पक्ष पिता-सी थी

सच्ची सहेली की तरह सही गलत की राय देने वाली..
लड़की हूं हजार विकट घड़ियों में जिसने रास्ता दिखाया वह मेरी शिक्षिका थी..
कल्चरल प्रोग्राम की देर समाप्ति पर जब तक मां नहीं आई तब तक जो हाथ थामे खड़ी थी वह मेरी शिक्षिका थी..
जौहरी की तरह परख कर मेरे हुनर को हीरे के रूप में तराश कर जो दुनिया के सामने लाई थी वह मेरी शिक्षिका थी
मेरी प्रस्तुतीकरण पर तालियों की गड़गड़ाहट में मेरे उज्जवल भविष्य का जो उद्घोष लेकर खड़ी थी वह मेरी शिक्षिका थी
एक इंसान एक रिश्ता निभाता है जिसने हर रिश्ता बखूबी निभाया मेरी शिक्षिका थी

माना अभी तक पैरों पर खड़ी नहीं हो पाई लेकिन बार-बार उठने की कोशिश करते रहना जिस ने सिखाया था वह मेरी शिक्षिका थी

मेरी शिक्षिका मात्र शिक्षिका नहीं मेरी जिंदगी की सफलताओं की कुंजी थी


*मेरी जिंदगी से जुड़ी हर शिक्षिका-शिक्षक को शिक्षक दिवस की ढेर सारी शुभकामनाएं*


आरम्भ हैं प्रचण्ड...

आरम्भ है प्रचण्ड, बोले मस्तकों के झुंड आज जंग की घड़ी की तुम गुहार दो आन बान शान या कि जान का हो दान आज इक धनुष के बाण पे उतार दो आरम्भ है प...