"मजहब नहीं सिखाता,आपस में बैर रखना
हिन्दी हैं हम,वतन है हिन्दोस्ताँ हमारा"
मोहम्मद इकबाल साहब की इन पंक्तियों पर हमें गर्व होना चाहिए कि हम इतनी बड़ी आबादी वाले देश हिंदुस्तान के रहने वाले हैं और भाषा ही हमारी पहचान है
"पग पग पर बदले पानी
पग पग पर बदले वाणी..."
"विविधता में एकता भारत की विशेषता"
भले ही हिंदुस्तान विभिन्न बोलियों के मोतियों की माला वाला देश रहा है लेकिन इस हिंदुस्तान की माला का धागा हमेशा हिंदी ही रहा है..
आज 14 सितंबर संपूर्ण भारत में हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाता है...
कहा जाता है 'व्यौहार राजेन्द्र सिंहा' का जन्म दिवस आज के दिन पड़ता हैl उनका अमूल्य योगदान रहा है हिंदी के विकास में... उनकी ही याद में हिंदी दिवस 14 सितंबर को मनाया जाता हैl
*आज से 43 साल पहले अटल बिहारी वाजपेयी ने संयुक्त राष्ट्र में हिंदी में बोलने का फैसला किया...वे उस समय मोरारजी देसाई की सरकार में विदेश मंत्री थे... सन 1977 में संयुक्त राष्ट्र महासभा का 32वां सत्र था...संयुक्त राष्ट्र महासभा में उनका पहला संबोधन था और उन्होंने अपनी बात हिंदी में कहने का फैसला किया।
गर्व है हमें राष्ट्र के इन नेताओं पर।
*प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 75वें सत्र में हिंदी भाषा में संबोधित किया। उन्होंने अपने संबोधन में वैश्विक चुनौतियों के साथ भारत की उपलब्धियों को भी रेखांकित किया।
*प्रधानमंत्री मोदी इससे पहले भी संयुक्त राष्ट्र में संबोधित कर चुके हैं। वह देश के लिए सम्मान और गौरव के क्षण थे।
*इससे पहले बीते वर्ष देश के सम्मान में उस समय और अधिक इजाफा हुआ था जब संयुक्त राष्ट्र संघ ने ट्विटर पर हिंदी में अपना अकाउंट बनाया और हिंदी भाषा में ही पहला ट्वीट किया। पहले ट्वीट में लिखा संदेश पढ़कर हर भारतीय का सीना गर्व से चौड़ा हो जाएगा। इतना ही नहीं संयुक्त राष्ट्र संघ ने फेसबुक पर भी हिंदी पेज बनाया है।
हिंदी की बिंदी की माध्यम से मेरा एक प्रयास है हिंदी को बढ़ावा देनाl
हमारी भाषा ही हमारी पहचान है और अपनी पहचान को एक नया स्तर तक पहुंचाना.. मैं अपना कर्तव्य समझती हूं।
*हिन्दी दिवस प्रत्येक वर्ष 14 सितम्बर को मनाया जाता है।
*14 सितम्बर 1949 को संविधान सभा ने सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया कि हिंदी ही भारत की राजभाषा होगी।
*इसी महत्वपूर्ण निर्णय के महत्व को प्रतिपादित करने तथा हिन्दी को हर क्षेत्र में प्रसारित करने के लिये राष्ट्रभाषा प्रचार समिति वर्धा के अनुरोध पर वर्ष 1953 से पूरे भारत में 14 सितम्बर को प्रतिवर्ष हिन्दी-दिवस के रूप में मनाया जाता है।
*एक तथ्य यह भी है कि 14 सितम्बर 1949 को हिन्दी के पुरोधा व्यौहार राजेन्द्र सिंहा का 50-वां जन्मदिन था, जिन्होंने हिन्दी को राष्ट्रभाषा बनाने के लिए बहुत लंबा संघर्ष किया ।
*स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद हिन्दी को राष्ट्रभाषा के रूप में स्थापित करवाने के लिए काका कालकेलकर मैथिलीशरण गुप्त हजारी प्रसाद द्विवेदी सेठ गोविंद दास आदि साहित्यकारों को साथ लेकर व्यौहार राजेन्द्र सिंहा ने अथक प्रयास किए।
*मुझे मेरी भाषा हिंदी पर गर्व है क्योंकि मेरी हिंदी का प्रथम वर्ण 'अ' से अज्ञ से शुरु होकर 'ज्ञ' से ज्ञान तब लेकर जाता है।
*भारत की नागरिक होने के नाते मुझे आज गर्व है कि मैंने मेरी ब्लॉग की शुरुआत हिंदी में ही की..
मैं गूगल की आभारी हूं क्योंकि उन्होंने ब्लॉक में हिंदी भाषा की टाइपिंग को जोड़ा।
*सन्1918 में गांधीजी ने हिंदी साहित्य सम्मेलन में हिन्दी भाषा को राष्ट्रभाषा बनाने को कहा था। इसे गांधी जी ने जनमानस की भाषा भी कहा था।
*14 सितम्बर 1949 को काफी विचार-विमर्श के बाद यह निर्णय लिया गया जो भारतीय संविधान के भाग 17 के अध्याय की अनुच्छेद 343(1) में इस प्रकार वर्णित है:
*संघ की राष्ट्रभाषा हिन्दी और लिपि देवनागरी होगी। संघ के राजकीय प्रयोजनों के लिए प्रयोग होने वाले अंकों का रूप अंतर्राष्ट्रीय रूप होगा।
*बोलने वालों की संख्या के अनुसार अंग्रेजी और चीनी भाषा के बाद हिन्दी भाषा पूरे दुनिया में तीसरी सबसे बड़ी भाषा है।
-लेकिन उसे अच्छी तरह से समझने, पढ़ने और लिखने वालों में यह संख्या बहुत ही कम है।
इस कारण ऐसे लोग जो हिन्दी का ज्ञान रखते हैं या हिन्दी भाषा जानते हैं, उन्हें हिन्दी के प्रति अपने कर्तव्य का बोध करवाने के लिए इस दिन को हिन्दी दिवस के रूप में मनाया जाता है
जिससे वे सभी अपने कर्तव्य का पालन कर हिन्दी भाषा को भविष्य में विलुप्त होने से बचा सकें।
-लेकिन लोग और सरकार दोनों ही इसके लिए उदासीन दिखती है।हिन्दी को आज तक संयुक्त राष्ट्र संघ की भाषा नहीं बनाया जा सका है।
*इसे विडंबना ही कहेंगे कि योग को 177 देशों का समर्थन मिला, लेकिन हिन्दी के लिए 129 देशों का समर्थन क्या नहीं जुटाया जा सकता?
* हिंदी की बिंदी मेरा पहला कदम है।
* गर्व इस बात पर नहीं कि कहां तक जाएगा जबकि इस बात पर है कि बढ़ रहे पाश्चात्यकरण की स्थिति में मेरा यह कदम एक हिंदुस्तानी की आत्मा का प्रतिदर्शी होगा।
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