Tuesday, October 13, 2020

पहली पोस्टिंग का एहसास (स्वरचित कविता)


कभी सोचा ना था,
ऐसा दिन भी आएगा..
यह पहली पोस्टिंग का एहसास था
जो कहीं और ले कर जाएगाl

कुछ समझ ना पाई,
कुछ संभल ना पाई,
उस दिन कुछ ऐसे ही
विश्वास ना कर पाईl

जानती तो सब कुछ थी,
पर कल्पना नहीं की थी,
अपने गांव को ही अपना
निश्चित कोना मान चुकी थीl

यह मेरी जिंदगी की पहली उड़ान थी,
आशातीत आकाश खुला था
बस मैं उड़ना नहीं जानती थी
लेकिन उस दिन फड़फड़ा लेना चाहती थीl

जिंदगी में पहली बार बाहर निकली थी,
हर परिवर्तन में ढल जाना चाहती थी,
हर खुशी को अपना बना लेना चाहती थी,
जी हां मैं अपने पति की पहली पोस्टिंग को यादगार बना लेना चाहती थीl

नया शहर,नए लोग,
नई दुकानें तो नए मंदिर,
बस देखते ही देखते जिंदगी से जुड़ते गए
लगा जैसे उनको मेरी राह में बरसों बीत गएl

हर पल जो फिसलता जा रहा था,
उसे रोक लेना चाहती थीl
हर क्षण जो बिखरता जा रहा था,
उसे सिमेट लेना चाहती थीl
हर चीज जिसमे परायापन था,
उसे अपना बना लेना चाहती थीl
किराए के घर की अनजान गली में
खूबसूरत सफर जी लेना चाहती थीl

कभी सोचा ना था,
जिंदगी का ऐसा अध्याय खुलेगा..
यह पहली पोस्टिंग का एहसास था
जो इतनी खुशियां लाएगा...

2 comments:

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