- अज्ञात
आओ! मिलकर हिंदी को आगे बढ़ाएं..जो विचार मन में दबे हैं उन्हें बाहर लाएं..ऐसी कल्पना जो अद्भुत हो..जो सबसे अलग हो उसको सामने लाएं..और जो इतिहास में महान कवि हुए हैं..उनको फिर से याद करें..उनकी पंक्तियों को फिर से दोहराएं..जिनकी कलम तलवारों से भी तेज़ चली..फिर से उन्हें काव्यांजलि चढ़ाएं..आओ! हिंदी को सवारे..आओ दोस्तों! मिलकर हिंदी को फिर से दुल्हन सा सजाएं..
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आरम्भ हैं प्रचण्ड...
आरम्भ है प्रचण्ड, बोले मस्तकों के झुंड आज जंग की घड़ी की तुम गुहार दो आन बान शान या कि जान का हो दान आज इक धनुष के बाण पे उतार दो आरम्भ है प...
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यह वही इमारत है जिसकी आधी वफादार मैं हूंl जगती हूं हर रोज जल्दी तो देर यहां नहीं होती है बड़ा ही विचित्र लगाव है मेरे पति का इस दफ्तर से.. ज...
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क्या तारीफ ए काबिल है?बर्दाश्त की यह हद दिनों दिन फेंकी जा रही है,मौतें बारूदो में लद अचरज नहीं है,मुझे आतंकवादियों की गति से अचरज है,मुझे अ...
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